गामक जीवन के मिठास : देसी माछ | अपूर्व स्वाद जँ सिलौठी पर पीसल मशल्ला आ पारम्परिक चुल्हा पर बनल
'पग-पग पोखरि माछ मखान'
मिथिला के खान-पान : लोक के गामक जीवन के मिठास के दिस अनायास खींच लैत छै।
चंन्ना पोठी गइचा भुल्ला कौआ इचना आ विविध माछक संग कांकोर। अंडायल माराक संग गोटपङ्गरा पोठी। सिंधी, कबई, गैंची, गरई, टेंगरा । गैंची-पोठी के अलावे गरई, सिंगही आ गोटे-आधे सूही ।
अपूर्व स्वाद जँ सिलौठी पर पीसल मशल्लाआ पारम्परिक चुल्हा पर बनल इ टेंगरा आ छही माछ भेटय।
Photo Credit : जयचन्द्र झा (पघारी)
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'माछ'
उठू यौ बौआ भेलै भोर
माछक दर्शन कए होउ विभोर !
बाबू अनलन्हि अछि बाजार सँ
सिंघी, मांगुर माछ दुइ सेर
पोठी, टेंगरा नहि थिक बौआ
जे देखि खसै अछि आँखि सँ नोर
उठू यौ बौआ भेलै भोर ------
मिथिला थिक ई माछक धरती
जतय नदी, पोखरि अछि पाटल
माछ, मखान सँ भरल रहैत अछि
गामक पोखरि, जलचर चहुँओर
उठू यौ बौआ भेलै भोर -------
माछक नाम सुनितहि भरि जाइछ
मुंह मे पाइन बनि टपकै लार
बड़ प्रिय लागय रोहु, बुआरी,
सिंही, मांगुर आ कबई केर झोर
उठू यौ बौआ भेलै भोर-------
टेंगरा, पोठी बड़ होइछ सुअदगर
कांटक संग झट खाइ चिबाय
पोसल विलाइ बैसल भंसाघर
मारय कनखी बनि माछक चोर
उठू यौ बौआ भेलै भोर-------
बाबा पोखरि अछि भरल माछ सँ
नैनी, केटला आ सिल्वर कार्प
गरै, गैंची, झींगा, सौरा अछि
जे बिनु कांट आ खंड बेजोड़
उठू यौ बौआ भेलै भोर-------
माछ भात थिक उत्तम भोजन
जे बढबै मिथिला केर मान सम्मान
बिनु माछ की रुचिकर भोजन
होयत पाहुन केर स्वागत भरि पोख
उठू यौ बौआ भेलै भोर-------
पहिने खाउ किछु तरल माछ आ
भूजल चूरा संग हरिअर मिरचाइ
तखन ने बूझब स्वाद माछ केर
बिनु तेल मसाला नहि लगौने झोर
उठू यौ बौआ भेलै भोर -------
मिथिला केर ब्राह्मण पंडित सभ
त्यागथि कोनो नहि माछक भोज
खाय माछ पुनि करथि अर्चना
नहि छन्हि कनियो किछु जी पर जोर
उठू यौ बौआ भेलै भोर --------
आदित्य 'अरविन्द'
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