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सिन्दुर- पिठार

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  सिन्दुर- पिठार #घर_आंगन_के_सजाबई बला एहि पौधा के नाम त नैहि बुझल य मुद्दा देखै म अरिकेन्चन पता जेकां लागै य। प्राचीन कालक किछ वृतांत लोक सब के मुँह से सुनै छी जे माता भगवती सब द्वारा एहि पता क गौरीपूजन में उपयोग कइल गेल अइछ। #औरो कोनो प्राचीन कालक वृतांत अहाँ सब के बुझल अइछ त जरूर कहब। एकर नाम छै सिन्दुर- पिठार । सीताचंदनक पात  सेहो कहैत छी । लोक सब के मुँह से सुनै छी जे :  ई मैना पत्ता छैक,हमर सब दिस कहबी अछि जे सीताजी एहि पात पर सिंदूर पिठार लगा क मधुश्रावणी पूजने छैथ,ताहि कारण छीट वला पात पर पूजा नै होइत छैक । अक्षत चन्दन महादेव छिटेन छयथ । Post Credit: H.P. Mishra Like our page:  https://www.facebook.com/Ucchati

अलाय पलाय के साग 😊

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 अलाय पलाय के साग 😊 जखन  चैत बैसाख और शुरुआतक आसिन मास रहै छै त कोनो मुख्य साग  सब अनुपलब्ध भ जाइत छै ,मुदा विना सागक भोजन संपुर्ण  कोना तै ं बारी झारी  मे अनेरुआ जनमल सागक प्रजाति सब से साग बनैत ऐछ । कतौ दू मूरी गेनहारी ,फुलगेनहारी कतौ वनपलांकी ,त कतौ भुटका ।चारि मूरी रैचीक त दसटा पात तिलकोर ,  किछु गदहपरैन  त कनेक अमरोरा त कतौ जनयल बथुआ  ,दू पात मुलायम कदीमा क वा कोबी चारि पात आलूक  ,पिपरा एवक्रमेण एक सांझक सागक ओरियान। ई एक तरहक अति महत्वक जड़ी बूटी सेहो भेल जकरा अलग स बनेबै त स्वादिष्ट ओतेक नै होयत मुदा संग मिला देबै त बारह मसाला तेरह स्वाद 😊 हम आइ चारि टाके मिलेलौं ...करमी ,कन्ना तिलकोर और गदहपुरैन । कनिक तेल मे मेथी हिंगक  मेरचाई ,तेजपात केफोरन द के भुजि ली बैन गेला क बाद उपर स तेल सानि ,हरियर मेरचाइ गूरि के सुवैइद सुवाइद के खाइ ।कांच तेल जरुर स मिलाबी ई साग महिले लोकनिक जोगार आ स्वादो हुनके लोकनि के लगैत छैन्ह कदिमा गदहपुरैन तिलकोरक कर्मी मिलाकए साग एतेक सागक नामो नय सुनने छलो... सागक संगम बहुत स्वादिष्ट साग अछि । संभवतः एकरे अन्...

बेजन्त्रिक / सर्वजाया फूल

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 बेजन्त्रिक / सर्वजाया फूल #बेजन्त्रिक_फूल_अपन_फ़ुलवारी_में ! एकर बहुत महत्त्व छै । ई फूल सब देवता केप्रिय छैन खाश के भगवती और विष्णुरुप के । एकर माला के महत्व रत्न स वेसी फलदायी छै । बिष्णु भगवान के आ राधा कृष्ण सीता राम के बहुत प्रसिद्ध छनि .. कतेको गीत में उर बैजयंती मालक बर्णन अछि जे भगवान सभक सुन्दरता बढबैत छन्हि । Photo Credit : H. P. Mishra Like Our Page : https://www.facebook.com/Ucchati

पोरे क साग - के सब खेनइ छी? ई साग बड़ी चहटगर बनै य औऱ बहुत गुणकारी य।

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 पोरेक साग - के सब खेनइ छी?  ई साग बड़ी चहटगर बनै य औऱ बहुत गुणकारी य। पोरइ कतो लतरि जाइत छै गाम में।

ठढ़िया सागक चटनी

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ठढ़िया सागक चटनी    लोढ़ी सिलौट पर पीसल चटनी के स्वाद चहटगर होइत अछि ।  महानगर में ई प्रायः विलुप्त भऽ गेल अछि आ अधिकांश लोक मिक्सी में पिसैत छथि । साभार: वंदना

कन्ना पात आ चकोर के फूल | विशिष्ट ज्ञानवर्धन

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कन्ना पात कोनो ने कोनो रुप मे साग ,भोजनक हिस्सा बनबे करैत छै चाहे सावन रहौ वा भादव 😀 हे लीय चिनहू कोन साग छी और कोना खायल जायत बहुत मोन प्रसंन्न भेल जे लगभग सब के जानकारी मे ऐछ जे इ तैर के खायल जाइत छै आउ आब एकर जानकारी ली जे ई कियैक अपन सबहक खान पान मे जगह बनौनै ऐछ ।  आयुर्वेद उपचार स बेसी खान पानक पद्धति छीयै । जकर बहुत ब्याख्या त नै कतौ भेटै छै लेकिन परंपरा स ओ विहित और निहित रहै छै । एहि कन्नापातक के बारे मे जहां तक हमरा पता ऐछ जे ई लीवर के टौनिक छीयै । एकर गुण शीतल होइत छै और मुत्रल तैं ई प्रमेह मे फायदा करैत छै । शरीर मे भीतर या बाहर कतौ जदि सुजन होइ त एकर पचांग क्वाथ देल जाइत छै । पेटक जलन ,मासिक धर्मक गरवरी ,बांझपन ,मुत्रकृच्छ ,त्वचा रोग मे ई उपयोगी छै । आदिवासी सब एकरा इम्यूनीटी बुस्टर के रुप मे मानै छै। दवाइ के प्रयोग त वैद्यक उपयोगक वस्तु भेल ।लेकिन अपन सबहक पारंपरिक खानपन मे सब समैया वस्तुक समावेश कैल गेल छै जकर पालन केला स बहुत छोट मोट समष्या पैघ भके नै उभरै छै ।  तैं जे समैया उत्पाद छै ओकरा अपन खानपाश मे शामिल करी और एहि स बेसी जानकारी हो त उपलब्ध कराबी 🙏 -----...

कतेक बदलि गेल संसार

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कतेक बदलि गेल संसार *************** चाउरक बदलेन माछ भेटैत छल, आमक बदलेन खरबूजा, झिल्ली कचरी कतय बिलाओल, सांझ पङैत कंसारक भूजा। कतेक बदलि---------। कतय बिलाओल बखारी मुनहर, कतय बिलाओल संदूक आ कोठी, कतय बिलाओल उखैर समाठ मेह, कतय बिलाओल जांत ओ ढेकी। कतेक बदलि---------। भोर-सांझ दुपहर छल लोकक हलचल, भूत-प्रेत चूरीणक डरे तैयो सहमल, तांत्रिक-वैद ओझा सबहक भरमार, जङी-बूटी, बुढ-पुरानक नुस्खा उपचार। कतेक बदलि---------। कतय गेलैय सांचीक धोती कुर्ता, मिरजई-पाग,टीक ठोप आ दुपट्टा, पायर मे खङाम, माथ पर मुरेठा, नै मौगी के घोघ,नै पुरूषक खखसबाक वेवहार। कतेक बदलि---------। आमक गाछी मे नव बांसक झूला, सिंगी-पताली,चोरानुकी आ रासलीला, जुङि-शीतल मे बांसक फुचकारी, करीन पटबय लेल खेती के औजार। कतेक बदलि---------। कतय बिलाओल हुक्का लोली, फगुआ गीत, रंग- अबीर संग माटिक होली, सामा-चकेबा,झिलहोरि आ पराती, नव कुट्टी चूङा संग गुङक वेवहार। कतेक बदलि---------। डमरू बाजय , सबमीलि कय दौङी, के आंगा, के पांछा, सब छौङा छौङी, वाइसकोप सँ सिनेमा देखी बारम्बार, भाट-पमरिया,गुदरिया बाबा के भरमार...