अलाय पलाय के साग 😊


 अलाय पलाय के साग 😊

जखन  चैत बैसाख और शुरुआतक आसिन मास रहै छै त कोनो मुख्य साग  सब अनुपलब्ध भ जाइत छै ,मुदा विना सागक भोजन संपुर्ण  कोना तै ं बारी झारी  मे अनेरुआ जनमल सागक प्रजाति सब से साग बनैत ऐछ । कतौ दू मूरी गेनहारी ,फुलगेनहारी कतौ वनपलांकी ,त कतौ भुटका ।चारि मूरी रैचीक त दसटा पात तिलकोर ,  किछु गदहपरैन  त कनेक अमरोरा त कतौ जनयल बथुआ  ,दू पात मुलायम कदीमा क वा कोबी चारि पात आलूक  ,पिपरा एवक्रमेण एक सांझक सागक ओरियान। ई एक तरहक अति महत्वक जड़ी बूटी सेहो भेल जकरा अलग स बनेबै त स्वादिष्ट ओतेक नै होयत मुदा संग मिला देबै त बारह मसाला तेरह स्वाद 😊 हम आइ चारि टाके मिलेलौं ...करमी ,कन्ना तिलकोर और गदहपुरैन ।


कनिक तेल मे मेथी हिंगक  मेरचाई ,तेजपात केफोरन द के भुजि ली बैन गेला क बाद उपर स तेल सानि ,हरियर मेरचाइ गूरि के सुवैइद सुवाइद के खाइ ।कांच तेल जरुर स मिलाबी

ई साग महिले लोकनिक जोगार आ स्वादो हुनके लोकनि के लगैत छैन्ह कदिमा गदहपुरैन तिलकोरक कर्मी मिलाकए साग

एतेक सागक नामो नय सुनने छलो... सागक संगम बहुत स्वादिष्ट साग अछि ।

संभवतः एकरे अन्नकूटक साग कहैत छैक जे कहाँ दन मगध सम्राट चन्द्रगुप्त के बड्ड पसीन छलैन । विन्दुसार पुत्र आ कौटिल्य (चाणक्य)शिष्य

विभिन्न सागक मिश्रण से जे साग बनैत छैक तकर अन्नकूट साग कहल गेलैये

कोनो एक रंगक साग में ओ अपूर्व स्वाद कहाँ जे अलय पलय साग मिला क बनैत अछि ई त अपन मिथिले टा में भेटि सकैत अछि और कतहु नहिं

तिलकोर पात सेहो साग में मिलाल जाइ छइ इ नै बुझल छल अवसर भेटिते ट्राइ करब आइ तक खेनै नइ छी - तिलकोर पात भुजि के खेला से शुगर और मानसिक रोग ठीक भ जाइत छै - लोहना मे एकटा बैद्य छथि जे तिलकोर खुआ कय मानसिक रोगी के ठीक करै छथि

Post Credit : Ranju Mishra


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