कतेक बदलि गेल संसार



कतेक बदलि गेल संसार
***************
चाउरक बदलेन माछ भेटैत छल,
आमक बदलेन खरबूजा,
झिल्ली कचरी कतय बिलाओल,
सांझ पङैत कंसारक भूजा।
कतेक बदलि---------।

कतय बिलाओल बखारी मुनहर,
कतय बिलाओल संदूक आ कोठी,
कतय बिलाओल उखैर समाठ मेह,
कतय बिलाओल जांत ओ ढेकी।
कतेक बदलि---------।

भोर-सांझ दुपहर छल लोकक
हलचल,
भूत-प्रेत चूरीणक डरे तैयो सहमल,
तांत्रिक-वैद ओझा सबहक भरमार,
जङी-बूटी, बुढ-पुरानक नुस्खा
उपचार।
कतेक बदलि---------।

कतय गेलैय सांचीक धोती कुर्ता,
मिरजई-पाग,टीक ठोप आ दुपट्टा,
पायर मे खङाम, माथ पर मुरेठा,
नै मौगी के घोघ,नै पुरूषक खखसबाक वेवहार।
कतेक बदलि---------।

आमक गाछी मे नव बांसक झूला,
सिंगी-पताली,चोरानुकी आ रासलीला,
जुङि-शीतल मे बांसक फुचकारी,
करीन पटबय लेल खेती के औजार।
कतेक बदलि---------।

कतय बिलाओल हुक्का लोली,
फगुआ गीत, रंग- अबीर संग माटिक होली,
सामा-चकेबा,झिलहोरि आ पराती,
नव कुट्टी चूङा संग गुङक वेवहार।
कतेक बदलि---------।

डमरू बाजय , सबमीलि कय दौङी,
के आंगा, के पांछा, सब छौङा छौङी,
वाइसकोप सँ सिनेमा देखी बारम्बार,
भाट-पमरिया,गुदरिया बाबा के भरमार।
कतेक बदलि---------।

नानी-मैंया सँ सांझ मे खिस्सा सुनल,
माई-काकी हाथक स्वीटर बुनल,
रहय गरीबी,तैयो धनिक छलौं हम,
पर-पाहुन के भेल सदा सत्कार।
कतेक बदलि---------।

की बिसरब आब पिरही आ लोटा,
नहिं देखब मास्टरक छौंकी कियो गोटा,
नै पनबट्टा , नै तमघैल देखबै,
पैनभरनी नै,नै कतहु रहत ईनार।
कतेक बदलि---------।

पुरना खेल मे लुडो ताश बचल अछि,
कनिक टा के घरवास बचल अछि,
गाय-महींस नै गामक गाम,
पाउडर के दूध सँ होइत सब त्योहार।
कतेक बदलि---------।

दलान बनि गेल अछि घरक बरंडा,
घरे-घर देखब मुर्गमस्सलम आ अंडा,
बुझेनै पतरा-पुरहित जोतिखी
पंडा,
कीर्तन-नाटक,रामलीला सँ कोनो सरोकार।
कतेक बदलि---------।

नै बैलगाड़ी अछि,नै अछि टमटम,
डिबिया- लालटेन भेल बहुत कम,
ईंटरनेटक जुग मे पढाइ भेल
ऑनलाइन,
विकासक केहेन तेज एलैय रफ्तार।
कतेक बदलि---------।

Credit : ईंजीनियर शिशिर कुमार झा।

Like this page here : https://www.facebook.com/Ucchati

Comments

Popular posts from this blog

गामक जीवन के मिठास : देसी माछ | अपूर्व स्वाद जँ सिलौठी पर पीसल मशल्ला आ पारम्परिक चुल्हा पर बनल

' अरिकंचन / एरकंचन ' निक लागैया की नै?