कन्ना पात आ चकोर के फूल | विशिष्ट ज्ञानवर्धन


कन्ना पात

कोनो ने कोनो रुप मे साग ,भोजनक हिस्सा बनबे करैत छै चाहे सावन रहौ वा भादव 😀 हे लीय चिनहू कोन साग छी और कोना खायल जायत



बहुत मोन प्रसंन्न भेल जे लगभग सब के जानकारी मे ऐछ जे इ तैर के खायल जाइत छै आउ आब एकर जानकारी ली जे ई कियैक अपन सबहक खान पान मे जगह बनौनै ऐछ । 
आयुर्वेद उपचार स बेसी खान पानक पद्धति छीयै ।

जकर बहुत ब्याख्या त नै कतौ भेटै छै लेकिन परंपरा स ओ विहित और निहित रहै छै । एहि कन्नापातक के बारे मे जहां तक हमरा पता ऐछ जे ई लीवर के टौनिक छीयै ।
एकर गुण शीतल होइत छै और मुत्रल तैं ई प्रमेह मे फायदा करैत छै ।
शरीर मे भीतर या बाहर कतौ जदि सुजन होइ त एकर पचांग क्वाथ देल जाइत छै ।
पेटक जलन ,मासिक धर्मक गरवरी ,बांझपन ,मुत्रकृच्छ ,त्वचा रोग मे ई उपयोगी छै ।

आदिवासी सब एकरा इम्यूनीटी बुस्टर के रुप मे मानै छै। दवाइ के प्रयोग त वैद्यक उपयोगक वस्तु भेल ।लेकिन अपन सबहक पारंपरिक खानपन मे सब समैया वस्तुक समावेश कैल गेल छै जकर पालन केला स बहुत छोट मोट समष्या पैघ भके नै उभरै छै । 

तैं जे समैया उत्पाद छै ओकरा अपन खानपाश मे शामिल करी और एहि स बेसी जानकारी हो त उपलब्ध कराबी 🙏


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चकोर के फूल


इ मिथिलाक बाड़ी झाड़ी में चकोर के फूल होइत अछि आ एकर तरुआ बड सुअदगर होइत अछि । 
अहि फूलक तरुआ सेहो बड्ड नीक होइत अछि । 

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